//Maa//❤️ ❤️
माँ एक अनसुलझी सी पहेली हैं, जिसको कभी कोई समझ ही नहीं पाया, मारती भी हैं ! तो हमको खाना खिलाने के लिये, घर में हो तो बाहर जाकर खेलने को बोलती हैं!
बाहर खेल रहे हो तो घर में आके रहने को कहती है। हाँ मानता हुँ, गुस्सा होती है, कहीं की बात कहीं और ले जाकर डांट देती हैं,
एक बार गुस्सा हो जाये तो छोटे बच्चों की तरह बात करना बन्द भी कर देती हैं! पर एक बात कभी देखी हैं, गुस्सा कितना भी हो खाना खिलाना नहीं भूलती, खुद अगर ना भी बोले तो भी कुछ न कुछ करके खिला ही देती हैं।
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खैर अब क्या लिखूं उस माँ के बारे में जो बिना कहे सब कुछ समझ जाती है! जो हमारे हसतें चेहरे से भी दुःख के आंसू देख जाती है, सायद उस माँ का एहसान कभी नहीं चुका पाऊंगा पर कोशिश रह जायेगी, उसका दिल कभी नही दुखाऊँगा! और थोडा साथ मेरे खुदा ने भी दिया, तो उस्सी खुदा की कसम, अपनी माँ की एक एक ख्वाईश पूरी कर जाऊंगा! ❤️
